टिप्पणियों में ब्लॉगरों की कहा-सुनी का रस, अखबारों के पाठक भी ले रहे!

20 Responses

  1. Suresh Chiplunkar says:

    यानी अब अखबार वाले भी समझने लगे हैं कि हि्न्दी ब्लॉग में अधिकतर मामले राखी-मीका टाइप के होते हैं और ब्लागरों में गुटबाजी, नौटंकी, टांग खिंचाई जैसे सदा-सर्वदा भारतीय गुण देखे गये हैं…

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  2. पं.डी.के.शर्मा"वत्स" says:

    अखिरकार हिन्दी चिट्ठाकार भी तो इसी भारतीय समाज के जन्तु हैं :)

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  3. रचना says:

    थोक = ठोक

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  4. Udan Tashtari says:

    दिलचप तो है ही टिप्पणी मुआयना!! :)

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  5. रचना says:

    ओ भैया ब्लॉग ब्लॉग व्यवस्थापक टिप्पणी मिटाई हैं तो नाम भी मिटा दो वरना लोग कहेगे अश्लील लिखा होगा

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  6. राजीव तनेजा says:

    अखबारों को भी तो मसाला चाहिए

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  7. Anonymous says:

    भैया !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
    सुनो सुनो सुनोssssssssssssssssssssss
    रचना ने किसी को भैया कहा!!!!!!!!!!
    ये क्या हो रहा है ब्लोग की दुनिया में???????????????????????????????????

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  8. Suresh Chiplunkar says:

    @ बेनामी – शायद रचना ने मुम्बईया स्टाइल में बिहारी "भैया" कहा होगा… :)

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  9. Anonymous says:

    @ Suresh Chiplunkar
    बिना "भैया" के किसी नारी का गुजारा नहीं!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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  10. Suresh Chiplunkar says:

    @ बेनामी "भाई" – अच्छा!!!!! मुझे पता नहीं था कि झाँसी की रानी ने अपनी लड़ाई "भाई" की मदद से ही लड़ी थी… :) वरना "बेचारी" लड़ ही ना पाती… है ना?

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  11. अजय कुमार झा says:

    ओह लगता है मुझे बुलाया गया है ….

    यार जो बातें इस छपे हुए आलेख में कहा गया है …उसे ही साबित किया जा रहा है शायद ….!

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  12. अजय कुमार झा says:

    सुरेश जी ,
    आपने बिहारी कहा न . सो चला आया …आप और बेनामी जी ..के बीच में नहीं हूं …इसलिए दोबारा टीप के क्लीयर कर दिया है …

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  13. Suresh Chiplunkar says:

    झा साहब एकदम सही कहा आपने… जरा मैं भी तो मौज लेकर देखूं कैसी हो्ती है… फ़िलहाल तो बेनामी ही सामने है… :) बाकी फ़िलहाल हिन्दी ब्लॉग जगत में जो हो रहा है वह किसी से छिपा नहीं है… नये-नवेले ब्लागर जानते नहीं होंगे लेकिन……

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  14. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    रसोई छोटी पड़ने लगी है। बरतन खड़क रहे हैं। बड़ी रसोई चाहिए।

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  15. अजय कुमार झा says:

    हा हा हा …बहुत बढिया सुरेश जी …मौज ले ही ली आपने आखिर ..ठीक है आज के दौर का सबसे अचूक अस्त्र है …

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  16. Anonymous says:

    @ Suresh Chiplunkar
    झाँसी की रानी की सेना भाई लोगों की ही थी बहनों की नहीं थी:-)

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  17. ललित शर्मा says:

    हिंदी चिट्ठाकारों की टिप्पणीयां भी इतिहास बनाती जा रही हैं,टिप्पणियों पर शोध करने वाला भी मौज ही ले रहा होगा।

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  18. Suresh Chiplunkar says:

    अब कहा-सुनी की बातें पुरानी हो गईं… अब मार-पीट की खबरें आने वाली हैं… :) जल्दी ही

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  19. सुलभ सतरंगी says:

    रस बरसे
    ब्लॉग जगत में रस बरसे

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  20. संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari says:

    पोस्‍ट क्‍या था टिप्‍पणियां क्‍यों थी. गडबड झाला है रे बाबा. हमारी रचना तो हमारे झोले में ही है आजकल कोई प्रकाशक नहीं मिल रहा ब्‍लाग टीपा लिखवाने के लिए.

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