आए दिन टिप्पणियों में ब्लॉगरों की आपसी कहा-सुनी, अब अखबारों में भी जगह पाने लगी हैं।
इससे पहले, पिछले माह काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका उत्तमा दीक्षित द्वारा अपनी कलाकृतियों को मोहल्ला लाइव ब्लॉग पर प्रदर्शित किए जाने पर हो रही उनकी आलोचना को, संबंधित टिप्पणीकारों के नाम सहित उल्लेख करते हुए, अमर उजाला ने एक समाचार में स्थान दिया था।
इस बार iNext ने 6 दिसम्बर 2009 को अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘ब्लॉग श्लॉग’ में ब्लॉगरों की इस आपसी कहा-सुनी का उल्लेख बड़े दिलचस्प अंदाज़ में किया है।
ऊपर दिए गए कतरन के चित्र पर सीधे क्लिक कर उसे पढ़ा जा सकता है।

यानी अब अखबार वाले भी समझने लगे हैं कि हि्न्दी ब्लॉग में अधिकतर मामले राखी-मीका टाइप के होते हैं और ब्लागरों में गुटबाजी, नौटंकी, टांग खिंचाई जैसे सदा-सर्वदा भारतीय गुण देखे गये हैं…
अखिरकार हिन्दी चिट्ठाकार भी तो इसी भारतीय समाज के जन्तु हैं
थोक = ठोक
दिलचप तो है ही टिप्पणी मुआयना!!
ओ भैया ब्लॉग ब्लॉग व्यवस्थापक टिप्पणी मिटाई हैं तो नाम भी मिटा दो वरना लोग कहेगे अश्लील लिखा होगा
अखबारों को भी तो मसाला चाहिए
भैया !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
सुनो सुनो सुनोssssssssssssssssssssss
रचना ने किसी को भैया कहा!!!!!!!!!!
ये क्या हो रहा है ब्लोग की दुनिया में???????????????????????????????????
@ बेनामी – शायद रचना ने मुम्बईया स्टाइल में बिहारी "भैया" कहा होगा…
@ Suresh Chiplunkar
बिना "भैया" के किसी नारी का गुजारा नहीं!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
@ बेनामी "भाई" – अच्छा!!!!! मुझे पता नहीं था कि झाँसी की रानी ने अपनी लड़ाई "भाई" की मदद से ही लड़ी थी…
वरना "बेचारी" लड़ ही ना पाती… है ना?
ओह लगता है मुझे बुलाया गया है ….
यार जो बातें इस छपे हुए आलेख में कहा गया है …उसे ही साबित किया जा रहा है शायद ….!
सुरेश जी ,
आपने बिहारी कहा न . सो चला आया …आप और बेनामी जी ..के बीच में नहीं हूं …इसलिए दोबारा टीप के क्लीयर कर दिया है …
झा साहब एकदम सही कहा आपने… जरा मैं भी तो मौज लेकर देखूं कैसी हो्ती है… फ़िलहाल तो बेनामी ही सामने है…
बाकी फ़िलहाल हिन्दी ब्लॉग जगत में जो हो रहा है वह किसी से छिपा नहीं है… नये-नवेले ब्लागर जानते नहीं होंगे लेकिन……
रसोई छोटी पड़ने लगी है। बरतन खड़क रहे हैं। बड़ी रसोई चाहिए।
हा हा हा …बहुत बढिया सुरेश जी …मौज ले ही ली आपने आखिर ..ठीक है आज के दौर का सबसे अचूक अस्त्र है …
@ Suresh Chiplunkar
झाँसी की रानी की सेना भाई लोगों की ही थी बहनों की नहीं थी:-)
हिंदी चिट्ठाकारों की टिप्पणीयां भी इतिहास बनाती जा रही हैं,टिप्पणियों पर शोध करने वाला भी मौज ही ले रहा होगा।
अब कहा-सुनी की बातें पुरानी हो गईं… अब मार-पीट की खबरें आने वाली हैं…
जल्दी ही
रस बरसे
ब्लॉग जगत में रस बरसे
पोस्ट क्या था टिप्पणियां क्यों थी. गडबड झाला है रे बाबा. हमारी रचना तो हमारे झोले में ही है आजकल कोई प्रकाशक नहीं मिल रहा ब्लाग टीपा लिखवाने के लिए.