न्याय सम्मत कार्यवाही: जनसत्ता में ‘नेपथ्यलीला’

1 Response

  1. DrDalsingarYadav says:

    हमारा समाज सहिष्णुता की राह छोड़ असहिष्णुता और व्यक्तिवाद, समाज से पहले अपना हित की राह पर चल पड़ा है। दिशाहीन भीड़ को मोड़ना यदि असंभव नहीं तो मुश्किल तो ज़रूर है।

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