30 मार्च 2011 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ अंतर्गत नेपथ्यलीला में बदले की भावना
30 मार्च 2011 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ अंतर्गत नेपथ्यलीला में बदले की भावना
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हमारा समाज सहिष्णुता की राह छोड़ असहिष्णुता और व्यक्तिवाद, समाज से पहले अपना हित की राह पर चल पड़ा है। दिशाहीन भीड़ को मोड़ना यदि असंभव नहीं तो मुश्किल तो ज़रूर है।