अहा! ज़िंदगी में समीर लाल, जगदीश्वर चतुर्वेदी, बी एस पाबला

मासिक पत्रिका, अहा! ज़िंदगी के जुलाई 2011 अंक से इंटरनेट की आभासी दुनिया तथा न्यू मीडिया पर आधारित एक नया स्तंभ ‘एक खिड़की, हजार दरवाज़े’ प्रारंभ किया गया है. इस बार समीर लाल, जगदीश्वर चतुर्वेदी, बी एस पाबला को उद्धृत करते हुए इंटरनेटीय चौपाल की बातें

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4 thoughts on “अहा! ज़िंदगी में समीर लाल, जगदीश्वर चतुर्वेदी, बी एस पाबला

  1. हा हा तो हमारे पाबला भैया,समीर दादा और चतुर्वेदीजी का ज़िक्र है यहाँ.इसमें कोई शक नही अभूत बड़े ब्लोगर और अच्छे इंसान हैं ये लोग.आहा जिंदगी अपने खूबसूरत रूप और पठनीय सामग्री के कारन मेरी प्रिय रही है.एक अलग अंदाज और पहचान है आहा जिंदगी की.ब्लॉग की दुनिया एक परिवार की तरह या यूँ कहूँ हमारे देश की जनसंख्या की तरह बढती जा रही है.सारी दुनिया सिमट कर एक अक्म्प्यूटर में आ गई है. पाबला वीरजी और दादा इत्तीईईई बधाई.चतुर्वेदीजी को भी.हा हा हा

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