एक पत्र भ्रष्टाचार बाबा के नाम: दैनिक जागरण में ‘सुमित के तड़के’

दैनिक जागरण में सुमित के तड़के

9 जुलाई 2011 को दैनिक जागरण, राष्ट्रीय संस्करण के नियमित स्तंभ ‘फिर से’ में सुमित के तड़के*** पत्र लिख कर

***मूल आलेख सुमित के तड़के पर है जिसे परिकल्पना पर पुन: लिखा गया है लेकिन जागरण पर उसे परिकल्पना का आलेख बता दिया गया

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  • निर्मलबाबा
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One Comment

  1. Mohan Kumar says:

    सुन्दर.

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