कुछ लोग ऐसे भी होते हैं: दैनिक भास्कर में ‘जिंदगी बस यही है’
22 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में जिंदगी बस यही है ऐसे भी
बेचैनी से भरा कवि: दैनिक भास्कर में ‘लिखो यहां वहां’
21 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में लिखो यहां वहां बेचैनी से
मैं तो गारी दूंगी: दैनिक भास्कर में ‘गीतों की महफिल’
20 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में गीतों की महफिल और गारी
आइये पीढ़ी अंतराल मिटायें: दैनिक भास्कर में ‘कहना पड़ता है’
18 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में कहना पड़ता है पीढी का अंतराल
जब ज़ुल्मो सितम के कोहे गरां: दैनिक भास्कर में ‘बैरंग’
17 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में बैरंग समीक्षा
मेरी कहानी, हमारी कहानी: दैनिक भास्कर में ‘जो न कह सके’
16 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में जो न कह सके कहानी
फ्रॉम अमस्टरडम: दैनिक भास्कर में ‘काव्य मंजूषा’
15 मई 2013 को दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया में काव्य मंजूषा फ्रॉम अमस्टरडम
हर शब्द की प्रतिध्वनि में तुम: दैनिक भास्कर में ‘बस यूँ ही अमित’
14 मई 2013 दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में बस यूँ ही माँ
स्वयं अपना आविष्कार: हिन्दुस्तान तथा दैनिक भास्कर में ‘उन्मुक्त’
13 मई 2013 को हिन्दुस्तान के नियमित स्तंभ ‘साइबर संसार’ तथा दैनिक भास्कर, भोपाल संस्करण के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में उन्मुक्त आविष्कार
