खामोशी की संगत पर कुदरत का राग: जनसत्ता में ‘प्रतिभा की दुनिया’
10 दिसंबर 2012 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में प्रतिभा की दुनिया ख़ामोशी संग
कितना कम जानते हैं हम ज़िंदगी को: जनसत्ता में ‘प्रतिभा की दुनिया’
21 अगस्त 2012 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में प्रतिभा की दुनियाको कितना जानते हैं
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बावरा मन: डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में ‘प्रतिभा की दुनिया’
14 जुलाई 2012 को डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग राग’ में प्रतिभा की दुनिया का आलेख
नीत्शे, देवता और स्त्रियाँ: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’
21 मई 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया और नीत्शे
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रहे सलामत मेरा पागलपन: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’
11 मई 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया रहे सलामत
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लिखना उसकी आंखों में प्रेम: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’
1 मई 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया लिखते लिखते
उगना: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’
16 अप्रैल 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया उगते हुए
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कागज पर कोई शब्द नहीं: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’
19 मार्च 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया बिना शब्द के
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आओ तोड़ दें ये कारा: हिन्दुस्तान में ‘प्रतिभा की दुनिया’
4 फरवरी 2012 को हिन्दुस्तान के नियमित स्तंभ ‘साइबर संसार’ में प्रतिभा की दुनिया दोस्तोवस्की को पलटते हुए
