नींद में इन दिनों ख्वाब नहीं: दैनिक भास्कर में ‘प्रतिभा की दुनिया’

हिंदी ब्लॉग -प्रतिभा की दुनिया अंतर्गत आई कविता को समाचारपत्र -दैनिक भास्कर ने अपने स्तंभ पर स्थान दिया
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वो लोगों से दुःख मांगता था: दैनिक भास्कर में ‘प्रतिभा की दुनिया’

हिंदी ब्लॉग -प्रतिभा की दुनिया अंतर्गत आई अभिव्यक्ति को समाचारपत्र -दैनिक भास्कर ने अपने स्तंभ पर स्थान दिया
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वो लोगों से दुःख मांगता था: डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में ‘प्रतिभा की दुनिया’

हिंदी ब्लॉग -प्रतिभा की दुनिया अंतर्गत आई प्रस्तुति को समाचारपत्र -डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट ने अपने स्तंभ पर स्थान दिया
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खामोशी की संगत पर कुदरत का राग: जनसत्ता में ‘प्रतिभा की दुनिया’

10 दिसंबर 2012 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में प्रतिभा की दुनिया ख़ामोशी संग
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कितना कम जानते हैं हम ज़िंदगी को: जनसत्ता में ‘प्रतिभा की दुनिया’

21 अगस्त 2012 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में प्रतिभा की दुनियाको कितना जानते हैं
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बावरा मन: डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में ‘प्रतिभा की दुनिया’

14 जुलाई 2012 को डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग राग’ में प्रतिभा की दुनिया का आलेख
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नीत्शे, देवता और स्त्रियाँ: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’

21 मई 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया और नीत्शे
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रहे सलामत मेरा पागलपन: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’

11 मई 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया रहे सलामत
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लिखना उसकी आंखों में प्रेम: आज समाज में ‘प्रतिभा की दुनिया’

1 मई 2012 को आज समाज के नियमित स्तंभ ‘ब्लॉग’ में प्रतिभा की दुनिया लिखते लिखते
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